न्यूज़ीलैंड में एंज़ैक दिवस: स्मरण और राष्ट्रीय पहचान
न्यूज़ीलैंड में हर साल 25 अप्रैल को सैन्य संघर्षों में सेवा देने वाले सैनिकों के सम्मान में एंज़ैक दिवस मनाया जाता है। यह दिन प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1915 में गैलीपोली प्रायद्वीप पर हुए सैनिकों के ऐतिहासिक उतरने की याद दिलाता है। देशभर के लोग सुबह के समय एकत्र होकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
गैलीपोली अभियान और एंज़ैक का इतिहास
एंज़ैक (ANZAC) का पूरा नाम ऑस्ट्रेलियन एंड न्यूज़ीलैंड आर्मी कोर है। 25 अप्रैल 1915 को मित्र देशों के अभियान के तहत इन सैनिकों ने तुर्क साम्राज्य के गैलीपोली प्रायद्वीप पर लैंडिंग की थी।
आठ महीने चले इस कठिन संघर्ष में 2,700 से अधिक न्यूज़ीलैंड के सैनिक मारे गए थे। यद्यपि यह सैन्य अभियान सफल नहीं हुआ, लेकिन सैनिकों के साहस ने न्यूज़ीलैंड की स्वतंत्र राष्ट्रीय पहचान को हमेशा के लिए आकार दिया।
भोर की प्रार्थनाएँ, लाल पोस्ता और एंज़ैक बिस्कुट
इस दिन का मुख्य आकर्षण सुबह 6:00 बजे युद्ध स्मारकों पर होने वाली भोर की प्रार्थना (Dawn Service) है। इसमें 'लास्ट पोस्ट' बिगुल बजाया जाता है और दो मिनट का मौन रखा जाता है। लोग लाल पोस्ता के फूल पहनते हैं।
इस दिन एंज़ैक बिस्कुट खाए जाते हैं, जो जई, सूखे नारियल और सुनहरे सिरप से बनते हैं। युद्ध के समय परिवार इन्हें सैनिकों के लिए भेजते थे क्योंकि ये लंबी समुद्री यात्रा में खराब नहीं होते थे।
व्यापारिक नियम और सार्वजनिक परिवहन
न्यूज़ीलैंड के कानून के तहत 25 अप्रैल को दोपहर 1:00 बजे तक अधिकांश दुकानों और बाज़ारों को बंद रखना अनिवार्य है ताकि लोग श्रद्धांजलि सभाओं में शामिल हो सकें।
सार्वजनिक परिवहन अवकाश समय-सारणी के अनुसार चलता है, हालांकि सुबह की प्रार्थना सभाओं में पहुँचने के लिए विशेष भोर बसें चलाई जाती हैं।
एंज़ैक दिवस से जुड़े सामान्य प्रश्न
एंज़ैक दिवस की प्रार्थनाएँ भोर में क्यों आयोजित की जाती हैं?
भोर का समय 1915 में गैलीपोली में सैनिकों के पहले उतरने के ऐतिहासिक समय और सैन्य सुबह की चौकसी का प्रतीक है।
क्या न्यूज़ीलैंड में एंज़ैक दिवस पर दुकानें खुली रहती हैं?
न्यूज़ीलैंड के कानून के अनुसार अधिकांश खुदरा दुकानें और मॉल 25 अप्रैल को दोपहर 1:00 बजे तक बंद रहते हैं।