मुहम्मद साहब का मबास: ईरान में नबूवत की शुरुआत का जश्न
मुहम्मद साहब का मबास उस पवित्र दिन की याद दिलाता है जब पैगंबर मुहम्मद को जिब्राइल से पहली वही मिली थी। रजब महीने की 27 तारीख को मनाया जाने वाला यह आधिकारिक अवकाश पूरे ईरान में श्रद्धा से मनाया जाता है। नागरिक विशेष प्रार्थनाओं और सामुदायिक उत्सवों के लिए मस्जिदों में एकत्र होते हैं।
इतिहास
मबास 610 ईस्वी की उस महत्वपूर्ण घटना की स्मृति में मनाया जाता है जब हीरा गुफा में पैगंबर मुहम्मद को पहला दैवीय संदेश प्राप्त हुआ था। फरिश्ते जिब्राइल ने उन्हें सूरह अल-अलक की आयतें पढ़ने का निर्देश दिया, जिससे इस्लाम की शुरुआत हुई। इस घटना ने क्षेत्र के आध्यात्मिक इतिहास को आकार दिया।
परंपराएं और भोजन
ईरान के लोग मस्जिदों में रात्रि प्रार्थना और विशेष सभाओं में भाग लेकर मबास मनाते हैं। परिवार पड़ोसियों और जरूरतमंदों में बांटने के लिए शोले जर्द जैसी पारंपरिक मिठाइयां तैयार करते हैं। सड़कों पर रोशनी और उत्सव की सजावट की जाती है।
बंद और यात्रा
ईरान में एक आधिकारिक राष्ट्रीय अवकाश होने के कारण सरकारी कार्यालय, बैंक और शैक्षणिक संस्थान बंद रहते हैं। सार्वजनिक परिवहन सामान्य समय सारिणी के अनुसार चलता है, हालांकि प्रमुख तीर्थस्थलों के पास भीड़भाड़ हो सकती है। यात्रियों को शहर में आवाजाही के दौरान सावधानी बरतनी चाहिए।
मुहम्मद साहब के मबास से जुड़े प्रश्न
क्या ईरान में मबास एक सार्वजनिक अवकाश है?
हाँ, यह एक आधिकारिक राष्ट्रीय अवकाश है जिसमें सरकारी कार्यालय, स्कूल और बैंक बंद रहते हैं।
यह त्योहार हर साल कब आता है?
यह इस्लामी चंद्र कैलेंडर के रजब महीने की 27 तारीख को पड़ता है, जिससे इसका ग्रेगोरियन तारीख हर साल बदलता है।