तुर्किये में क़ुर्बानी का त्योहार (ईद-उल-अज़हा)
तुर्किये में ईद-उल-अज़हा को कुर्बान बेयरामी कहा जाता है। यह राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश के साथ एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व भी है। यह ज़िलहिज्जा की दसवीं तारीख़ को शुरू होता है; तुर्की क़ानून पूर्वसंध्या पर दोपहर 1 बजे से साढ़े चार दिन का अवकाश तय करता है।[1][2]
अर्थ और धार्मिक पृष्ठभूमि
कुर्बान का अर्थ इबादत के ज़रिये ईश्वर के निकट होने का कार्य है। धार्मिक मामलों का निदेशालय बलिदान को पैग़ंबर इब्राहीम से जुड़ी और भक्ति दर्शाने वाली इबादत बताता है; धार्मिक शिक्षाएँ ज़रूरतमंद लोगों की देखभाल पर भी ज़ोर देती हैं।[2][3]
यह पर्व केवल भोजन या मांस बाँटने तक सीमित नहीं है। दियानेत बलिदान को इबादत बताता है और कहता है कि उसका मांस ज़रूरतमंदों, रिश्तेदारों, परिचितों और पड़ोसियों के साथ साझा करना इसके सामाजिक उद्देश्य का हिस्सा है।[3]
तारीख़ें और सार्वजनिक अवकाश क़ानून
पहला दिन ज़िलहिज्जा की 10 तारीख़ को पड़ता है। तारीख़ इस्लामी कैलेंडर से तय होती है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में इसकी तारीख़ हर साल बदलती है।[2][3]
तुर्किये का क़ानून संख्या 2429 कुर्बान बेयरामी को पूर्वसंध्या पर दोपहर 1 बजे से साढ़े चार दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित करता है। क़ानून कहता है कि राष्ट्रीय, आधिकारिक और धार्मिक अवकाशों पर सरकारी कार्यालय और प्रतिष्ठान बंद रहते हैं; लगातार काम करने वाले संगठनों के नियम बरकरार रहते हैं।[1]
क़ानून यह भी कहता है कि जब कोई सार्वजनिक अवकाश शुक्रवार शाम को समाप्त होता है, तो अगला शनिवार पूरे दिन का अवकाश होगा। अन्य परिस्थितियों के लिए यह कोई सामान्य वैकल्पिक दिन तय नहीं करता।[1]
इसे कैसे मनाया जाता है
सामूहिक बेयराम नमाज़ त्योहार की सुबह का हिस्सा है। दियानेत के दिशा-निर्देशों में नमाज़ियों के मस्जिद जाने और एक-दूसरे का अभिवादन करने का वर्णन है; इनमें बड़ों से मिलने, ज़रूरतमंदों की मदद करने, मतभेद सुलझाने और बच्चों को ख़ुशी देने को भी त्योहार के प्रचलित कार्यों में गिना गया है।[4]
बलिदान का मांस घर पर साझा किया जा सकता है या कहीं और इसकी व्यवस्था की जा सकती है। दियानेत के अनुसार, मांस घर के लोग खा सकते हैं, उपहार में दिया जा सकता है या दान के रूप में बाँटा जा सकता है; वह ज़रूरतमंदों, रिश्तेदारों, परिचितों और पड़ोसियों के साथ हिस्से बाँटने को अनुशंसित प्रथा बताता है।[3]
जगह के अनुसार रीति-रिवाज़ बदल सकते हैं। तुर्किये का संस्कृति पोर्टल इस्पार्ता के अपने विवरण में दर्ज करता है कि कुछ परिवार नमाज़ के बाद मांस तैयार करते हैं, उसे ज़रूरतमंदों के साथ बाँटते हैं और मेहमानों को परोसते हैं। उसी स्थानीय विवरण में बच्चों को मिठाई देने और क़ब्रों पर जाने का भी उल्लेख है; ये इस्पार्ता के दर्ज उदाहरण हैं, तुर्किये के हर हिस्से का नियम नहीं।[5]
बंद रहने की स्थिति और व्यावहारिक योजना
क़ानून के तहत अवकाश की अवधि में सरकारी कार्यालय और प्रतिष्ठान बंद रहते हैं; लगातार चलने वाली सेवाओं को अपवाद है। सभी दुकानों, रेस्तराँ या परिवहन सेवाओं के लिए क़ानून एक ही खुलने का समय तय नहीं करता, इसलिए यात्रियों को संबंधित सेवा प्रदाता या व्यवसाय से जानकारी लेनी चाहिए।[1]
क़ानून आधिकारिक अवकाश की अवधि तय करता है, लेकिन यह नहीं कहता कि निजी क्षेत्र के हर कर्मचारी को अपने-आप उन्हीं दिनों की छुट्टी मिलेगी। कार्यस्थल की व्यवस्था और लागू रोज़गार नियमों की जानकारी नियोक्ता से लें।[1]
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कुर्बान बेयरामी कब मनाया जाता है?
तुर्किये में आधिकारिक अवकाश कितने समय का है?
क़ानून संख्या 2429 पूर्वसंध्या पर दोपहर 1 बजे से साढ़े चार दिन की अवधि तय करता है।[1]
क्या सरकारी कार्यालय बंद रहते हैं?
क़ानून कहता है कि धार्मिक अवकाशों पर सरकारी कार्यालय और प्रतिष्ठान बंद रहते हैं; जिन संगठनों के काम के लिए लगातार सेवा ज़रूरी है, उन्हें अपवाद है।[1]
क्या दुकानें, बैंक और परिवहन सेवाएँ खुली रहेंगी?
यात्रा से पहले स्थानीय व्यवसायों के समय और परिवहन संचालकों की जाँच करें।
स्रोत और संदर्भ
तुर्किये में क़ुर्बानी का त्योहार (ईद-उल-अज़हा) के लिए इस्तेमाल किए गए स्रोत:
- Ulusal Bayram ve Genel Tatiller Hakkında Kanun- T.C. Diyanet İşleri Başkanlığı
- KURBAN - Sıkça Sorulanlar- Düzce Müftülüğü, T.C. Diyanet İşleri Başkanlığı
- Kurban Nedir?- Presidency of Religious Affairs, Republic of Türkiye
- Bayram Namazı İle İlgili Merak Edilenler- Iğdır Müftülüğü, T.C. Diyanet İşleri Başkanlığı
- Isparta Bayram Gelenekleri - Kurban Bayramı- T.C. Kültür ve Turizm Bakanlığı, Kültür Portalı