कोलंबिया में चिकिनकिरा की कुँवारी मरियम
कोलंबिया में चिकिनकिरा की कुँवारी मरियम का पर्व 9 जुलाई को मनाया जाता है। यह कैथोलिक पर्व बोयाका के चिकिनकिरा नगर से जुड़ी एक पूजनीय प्रतिमा से संबंधित है। कोलंबियाई कानून इस दिन को सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए देशव्यापी सवेतन अवकाश बनाता है; विश्राम-दिवस की तारीख एक अन्य राष्ट्रीय कानून के सोमवार को छुट्टी स्थानांतरित करने वाले नियमों से तय होती है।[1][2]
राष्ट्रीय अवकाश और उसकी तारीख
कानून 2578, 9 जुलाई को चिकिनकिरा की कुँवारी मरियम का दिवस और पूरे कोलंबिया में राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश घोषित करता है। यह सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों को सवेतन विश्राम का अधिकार देता है और निर्देश देता है कि विश्राम की तारीख तय करने के लिए 1983 के कानून 51 के लागू नियमों का पालन किया जाए।[1]
कानून 51 के तहत, सोमवार को न पड़ने वाले निर्धारित अवकाशों पर अगले सोमवार को सवेतन विश्राम मिलता है। धार्मिक पर्व की तारीख 9 जुलाई ही रहती है, इसलिए सवेतन छुट्टी किसी दूसरी तारीख को हो सकती है।[1][2]
प्रतिमा का इतिहास
यह भक्ति चिकिनकिरा की कुँवारी मरियम की एक प्रतिमा पर केंद्रित है। बैंको दे ला रेपुब्लिका के कला-संग्रह के अनुसार, एंटोनियो दे सांताना ने 1560 में यह प्रतिमा बनवाई थी। पहले इसे सूता के एक चैपल में रखा गया, फिर सामग्री खराब होने के बाद चिकिनकिरा के एक प्रार्थना-गृह में ले जाया गया। संग्रह के अनुसार, 26 दिसंबर, 1586 को प्रतिमा के पुनः नवीनीकृत होने की कथा सांताना की साली और एक सेवक की प्रार्थनाओं से जुड़ी किंवदंती है।[3]
यह प्रतिमा एक ऐतिहासिक चित्रकला है, केवल अवकाश के नाम में आया प्रतीक नहीं। बैंको दे ला रेपुब्लिका इसे कैनवास पर बना तैलचित्र बताता है और कहता है कि यह उसके संग्रह में 16वीं सदी की सबसे पुरानी बची हुई चित्रकृतियों में से एक है।[3]
कोलंबिया में इसका महत्व
यह भक्ति कोलंबियाई कैथोलिक इतिहास से गहराई से जुड़ी है। कोलंबियाई धर्माध्यक्षीय सम्मेलन चिकिनकिरा की कुँवारी मरियम को कोलंबिया की संरक्षिका बताता है और दर्ज करता है कि 9 जुलाई, 1919 को बोगोटा में प्रतिमा का विधिवत राजमुकुट-संस्कार हुआ। कोलंबियाई पादरियों ने इससे पहले ही यह तारीख कुँवारी मरियम के सम्मान के लिए तय कर दी थी। पवित्र आसन ने राजमुकुट-संस्कार के अनुरोध को 1910 में मंज़ूरी दी थी; वह राजमुकुट-संस्कार का वर्ष नहीं था।[4]
धर्माध्यक्षीय सम्मेलन कई कोलंबियाई विभागों से होकर प्रतिमा की प्रतिकृति के साथ डोमिनिकन भिक्षुओं की एक तीर्थयात्रा का भी विवरण देता है, जो राजमुकुट-संस्कार की तैयारी में हुई थी। यह इतिहास समझने में मदद करता है कि चिकिनकिरा में जड़ें रखने वाली भक्ति राष्ट्रीय धार्मिक प्रतीक कैसे बनी।[4]
धार्मिक आयोजन और व्यावहारिक असर
कैथोलिक आयोजन में धर्मविधि समारोह शामिल हैं। धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने इस पर्व और चिकिनकिरा की कुँवारी मरियम के तीर्थस्थल से जुड़े यूखारिस्तीय समारोहों का विवरण दिया है।[4]
निवासियों और आगंतुकों के लिए सबसे स्पष्ट व्यावहारिक असर कानून द्वारा स्थापित देशव्यापी सवेतन विश्राम का अधिकार है। जाने से पहले सरकारी कार्यालयों और बैंकों के खुलने का समय जाँच लें।[1]
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चिकिनकिरा की कुँवारी मरियम का पर्व कब मनाया जाता है?
क्या यह पूरे कोलंबिया में सार्वजनिक अवकाश है?
हाँ। कानून 2578 इसे पूरे कोलंबिया में राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश घोषित करता है और सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों के कर्मचारियों को सवेतन विश्राम देता है।[1]
इस भक्ति का केंद्र कहाँ है?
क्या दुकानें, बैंक और परिवहन सेवाएँ खुली रहती हैं?
जाने से पहले सरकारी कार्यालयों और बैंकों के खुलने का समय जाँच लें।[1]
स्रोत और संदर्भ
कोलंबिया में चिकिनकिरा की कुँवारी मरियम के लिए इस्तेमाल किए गए स्रोत:
- LEY 2578 DE 2026 - Colombia- Agencia Presidencial de Cooperación Internacional de Colombia (APC-Colombia), reproducing the law published in the Diario Oficial
- LEY 51 DE 1983- Ministry of Foreign Affairs of Colombia
- Virgen de Chiquinquirá - Pintura- Banco de la República, Art Collection
- El Papa nombra enviado por 100 años de coronación de la Virgen de Chiquinquirá- Conferencia Episcopal de Colombia