फ़्रेंच पोलिनेशिया में मिशनरी दिवस
मिशनरी दिवस 1797 में माटावई खाड़ी पर प्रोटेस्टेंट प्रचारकों के आगमन का स्मरण कराता है। 5 मार्च को मनाया जाने वाला यह आधिकारिक अवकाश फ़्रेंच पोलिनेशिया के इतिहास से जुड़ा है। इस अवसर पर स्थानीय लोग प्रार्थना सभाओं, नाटकों और सामूहिक भोज में भाग लेते हैं।
लंदन मिशनरी सोसाइटी के आगमन का इतिहास
5 मार्च 1797 को जॉन जेफ़रसन के नेतृत्व में लंदन मिशनरी सोसाइटी के सदस्य डफ़ जहाज से ताहिती के माटावई खाड़ी पहुंचे। उन्होंने स्थानीय द्वीपों में ईसाई धर्म का प्रसार आरंभ किया।
राजा पोमारे द्वितीय ने 1819 में बपतिस्मा ग्रहण किया, जिसके बाद जनता ने व्यापक स्तर पर नया धर्म अपनाया। फ्रांसीसी शासन के बावजूद प्रोटेस्टेंट प्रभाव बना रहा और सरकार ने 1978 में इसे सार्वजनिक अवकाश घोषित किया।
परंपराएं और पारंपरिक व्यंजन
माओही प्रोटेस्टेंट चर्च द्वारा विशेष प्रार्थनाएं और हिमेने संगीत सभाएं आयोजित की जाती हैं। पापीते के विली बैम्ब्रिज स्टेडियम और मूरिया द्वीप पर डफ़ जहाज के आगमन का नाट्य मंचन किया जाता है।
अरूए में राजा पोमारे द्वितीय और अनुवादक हेनरी नॉट के स्मारकों पर माल्यार्पण होता है। परिवार अहियामा भूमिगत चूल्हों में पका भोजन और नारियल दूध में बनी मछली का आनंद लेते हैं।
प्रतिष्ठान बंदी और यात्रा संबंधी सलाह
5 मार्च को सरकारी कार्यालय, स्कूल और बैंक पूर्णतः बंद रहते हैं। राजधानी पापीते के अधिकांश व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहते हैं, हालांकि पर्यटक रिसॉर्ट सामान्य रूप से संचालित होते हैं।
ताहिती और मूरिया के मध्य चलने वाली फ़ेरी सेवाएं अवकाश समय-सारणी के अनुसार चलती हैं। दूरस्थ द्वीपों की यात्रा कर रहे पर्यटकों को भोजन और परिवहन की पूर्व व्यवस्था करनी चाहिए।
मिशनरी दिवस के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या 5 मार्च को पूरे क्षेत्र में सार्वजनिक अवकाश होता है?
हाँ, यह फ़्रेंच पोलिनेशिया के सभी द्वीप समूहों में एक आधिकारिक गैर-कार्य दिवस है।
क्या पर्यटक ऐतिहासिक मंचन कार्यक्रमों को देख सकते हैं?
हाँ, पापीते और मूरिया में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कार्यक्रम जनता व पर्यटकों के लिए खुले हैं।