माली में क़ुर्बानी का त्योहार (ईद-उल-अज़हा)
माली में ईद-उल-अज़हा आम तौर पर तबास्की के नाम से जानी जाती है और राष्ट्रीय कानून में वैधानिक अवकाश के रूप में सूचीबद्ध है। यह 10 ज़ुल-हिज्जा को पड़ती है; गाओ से माली की एक सरकारी रिपोर्ट में वहाँ के आयोजन के हिस्से के रूप में नमाज़ और भेड़ की क़ुर्बानी का वर्णन है।[1][2]
अर्थ और नाम
माली का 2005 का कानून देश के वैधानिक अवकाशों में इस पर्व को “तबास्की दिवस” नाम देता है। माली के सशस्त्र बलों की आधिकारिक रिपोर्ट में भी ईद-उल-अज़हा के लिए तबास्की नाम इस्तेमाल किया गया है। इससे पता चलता है कि माली के सार्वजनिक जीवन में इस पर्व की पहचान किस नाम से होती है।[1][2]
यह पर्व पैगंबर इब्राहीम की आस्था की याद दिलाता है, जिन्हें रिपोर्ट में इब्राहिम कहा गया है। गाओ के विवरण में भेड़ की क़ुर्बानी उनके विश्वास और ईश्वर के प्रति समर्पण के कार्य का प्रतीक बताई गई है। यह उस स्रोत में वर्णित धार्मिक अर्थ है; कानून का पाठ अवकाश की स्थिति तय करता है, उसकी धार्मिक उत्पत्ति नहीं बताता।[1][2]
कैलेंडर में तारीख
तबास्की 10 ज़ुल-हिज्जा को पड़ता है। संबंधित वर्ष के लिए घोषित तारीख देखें, क्योंकि ग्रेगोरियन तारीख हर साल बदलती है।[1]
कानूनी पाठ तबास्की को वैधानिक अवकाश कहता है, लेकिन ग्रेगोरियन तारीख नहीं बताता। इसमें कहा गया है कि कुछ वैधानिक अवकाशों के बाद आने वाले कार्यदिवस को सरकार अवकाश घोषित कर सकती है; तबास्की के लिए अपने आप लागू होने वाला वैकल्पिक दिन तय नहीं है।[1]
नमाज़ और आयोजन
माली के सशस्त्र बलों की एक रिपोर्ट में गाओ के सैन्य शिविर की मस्जिद में आयोजित समारोह का वर्णन है। इसमें मस्जिद के इमाम के नेतृत्व में मुख्य नमाज़ दर्ज है, जिसमें दो रकात शामिल थीं, और बताया गया है कि सैनिक तथा उनके परिवार इस अवसर पर एकत्र हुए। यह गाओ का दर्ज उदाहरण है, माली की हर मस्जिद या समुदाय की समय-सारणी नहीं।[2]
उसी रिपोर्ट में भेड़ की क़ुर्बानी को पर्व के धार्मिक अर्थ से जोड़ा गया है और तबास्की को नमाज़, बाँटने, आनंद तथा आशीर्वाद का समय बताया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि यह उत्सव सामाजिक रिश्तों को मज़बूत करता है। ये विवरण रिपोर्ट की गई जगह पर उपासना और सामुदायिक मेल-मिलाप, दोनों की तस्वीर पेश करते हैं; वे यह स्थापित नहीं करते कि हर परिवार इस दिन को बिल्कुल एक ही तरह मनाता है।[2]
सार्वजनिक अवकाश और व्यावहारिक असर
माली के कानून के तहत वैधानिक अवकाशों और सरकार द्वारा घोषित अतिरिक्त दिनों में “काम नहीं होता और वेतन मिलता है।” स्रोत में तबास्की के बारे में यही सबसे स्पष्ट व्यावहारिक नियम है: यह वैधानिक अवकाश है। कानून किसी खास दफ्तर, बैंक, दुकान या परिवहन सेवा का उल्लेख नहीं करता, इसलिए उनके खुलने के समय और समय-सारणी की स्थानीय स्तर पर जाँच करें।[1]
कानून सरकार को कुछ वैधानिक अवकाशों के बाद अगले कार्यदिवस को अवकाश घोषित करने की अनुमति देता है, लेकिन तबास्की के लिए अगले दिन की छुट्टी अपने आप बढ़ाने का कोई नियम नहीं देता। जिस सेवा की यात्रियों को ज़रूरत हो, उसके समय की सीधे पुष्टि करें, खासकर अवकाश के आसपास योजना बनाते समय।[1]
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
माली में ईद-उल-अज़हा को क्या कहते हैं?
क्या माली में तबास्की सार्वजनिक अवकाश है?
हाँ। माली का कानून तबास्की को वैधानिक अवकाशों में सूचीबद्ध करता है और कहता है कि इन दिनों काम नहीं होता तथा वेतन मिलता है।[1]
तबास्की कब पड़ती है?
तबास्की 10 ज़ुल-हिज्जा को पड़ता है। संबंधित वर्ष की ग्रेगोरियन तारीख जाँचें, क्योंकि यह हर साल बदलती है।[1]
क्या इसके बाद आने वाला कार्यदिवस अपने आप अवकाश हो जाता है?
तबास्की के लिए अपने आप लागू होने वाला कोई वैकल्पिक दिन तय नहीं है। कानून कुछ वैधानिक अवकाशों के बाद आने वाले कार्यदिवस को सरकार द्वारा अवकाश घोषित करने की अनुमति देता है।[1]
माली में कौन से आयोजन दर्ज हैं?
माली के सशस्त्र बलों की गाओ संबंधी एक रिपोर्ट में मस्जिद में नमाज़ और भेड़ की क़ुर्बानी के साथ सैनिकों और उनके परिवारों के एकत्र होने का वर्णन है। प्रथाएँ और समय-सारणी समुदाय के अनुसार अलग हो सकती हैं।[2]
क्या दुकानें, बैंक और परिवहन सेवाएँ खुली रहती हैं?
कानून तबास्की को गैर-कार्यदिवस और वेतन सहित अवकाश घोषित करता है, लेकिन कारोबारों, बैंकों या परिवहन के खुलने का समय नहीं बताता। स्थानीय सेवा प्रदाता से पूछें।[1]
स्रोत और संदर्भ
माली में क़ुर्बानी का त्योहार (ईद-उल-अज़हा) के लिए इस्तेमाल किए गए स्रोत:
- Loi N°05-040/ du 22 juillet 2005 relative aux fêtes légales en République du Mali- Secrétariat Général du Gouvernement du Mali
- GAO: Malian Armed Forces Celebrate Eid al-Adha in Unity at Camp 1 Firhoun Ag Alincar- FAMa