श्रीलंका में नावम पूर्णिमा पोया दिवस का उत्सव
नावम पूर्णिमा पोया दिवस श्रीलंका में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक अवकाश है। यह दिन बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों, सारिपुत्ता और मोग्गाल्लाना की ऐतिहासिक नियुक्ति की याद दिलाता है। देश भर में लाखों बौद्ध अनुयायी धार्मिक अनुष्ठानों और भव्य सांस्कृतिक जुलूसों में हिस्सा लेते हैं।
इतिहास
यह पवित्र दिन वेलुवाना मठ में बुद्ध द्वारा अपने दो मुख्य शिष्यों, आदरणीय सारिपुत्ता और आदरणीय मोग्गाल्लाना की नियुक्ति की स्मृति में मनाया जाता है। इसी दिन बुद्ध ने ओवादा पातिमोक्खा का उपदेश दिया था, जो बौद्ध नैतिकता और अनुशासन के बुनियादी सिद्धांतों को रेखांकित करता है।
परंपराएं और भोजन
इस दिन का मुख्य आकर्षण कोलंबो के ऐतिहासिक गंगारामया मंदिर में आयोजित होने वाला 'नावम महा पेराहेरा' जुलूस है, जिसमें पारंपरिक नर्तक, ढोल वादक और सजे हुए हाथी शामिल होते हैं। लोग स्थानीय मंदिरों में जाकर फूल अर्पित करते हैं, ध्यान करते हैं और सामुदायिक शाकाहारी भोजन साझा करते हैं।
कार्यालय बंद और यात्रा
एक आधिकारिक सार्वजनिक और बैंक अवकाश होने के कारण सरकारी कार्यालय, स्कूल और अधिकांश व्यवसाय बंद रहते हैं। देश भर में मांस और शराब की बिक्री पर कानूनी प्रतिबंध होता है। कोलंबो की यात्रा करने वाले पर्यटकों को मंदिर के आसपास यातायात डायवर्जन का सामना करना पड़ सकता है।
नावम पोया दिवस से जुड़े प्रश्न
क्या नावम पोया श्रीलंका में आधिकारिक अवकाश है?
हाँ, यह एक राष्ट्रीय सार्वजनिक और बैंक अवकाश है जिस दिन सरकारी कार्यालय और स्कूल बंद रहते हैं।
इस दिन मुख्य आयोजन कहाँ होता है?
कोलंबो के गंगारामया मंदिर में आयोजित होने वाला 'नावम महा पेराहेरा' सबसे प्रमुख उत्सव है।