दक्षिण कोरिया में बुद्ध पूर्णिमा का उत्सव: लालटेन और विरासत
दक्षिण कोरिया में चंद्र कैलेंडर के चौथे महीने के आठवें दिन बुद्ध के जन्म का भव्य राष्ट्रीय उत्सव मनाया जाता है। अंधेरा होने के बाद लाखों रंग-बिरंगे कमल के आकार के लालटेन शहर की सड़कों और मंदिरों को रोशन करते हैं। यह आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश गहन सांस्कृतिक परंपराओं के साथ सिद्धार्थ गौतम के जन्म का सम्मान करता है।
ऐतिहासिक मूल और कोरियाई परंपरा
स्थानीय रूप से बुचेओन्निम ओसिन नाल के रूप में जाना जाने वाला यह आयोजन प्राचीन कोरियाई राज्यों से जुड़ा है जिन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया था। चंद्र कैलेंडर के अनुसार सिद्धार्थ गौतम के जन्म को मनाने की प्रथा एक हजार से अधिक वर्षों पुरानी है और यह देश की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है।
लालटेन उत्सव और मंदिर का भोजन
उत्सव का मुख्य आकर्षण येओन्ड्यूंगहोई महोत्सव है, जिसे यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल किया गया है। कमल के फूलों और ड्रैगन के आकार के हजारों लालटेन से सड़कें और मंदिर परिसर चमक उठते हैं। मंदिर आने वाले लोग पारंपरिक शाकाहारी भोजन का आनंद लेते हैं।
सार्वजनिक अवकाश और यात्रा संबंधी बातें
दक्षिण कोरिया में आधिकारिक राष्ट्रीय अवकाश होने के कारण बैंक, सरकारी कार्यालय और व्यावसायिक संस्थान बंद रहते हैं। सार्वजनिक परिवहन सुचारू रूप से चलता है, लेकिन सियोल के जोग्येसा जैसे प्रमुख मंदिरों के आसपास भारी भीड़ और ट्रैफिक होता है। यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लेनी चाहिए।
दक्षिण कोरिया में बुद्ध जयंती के बारे में प्रश्न
दक्षिण कोरिया में बुद्ध का जन्मदिन कब मनाया जाता है?
यह चंद्र कैलेंडर के चौथे महीने के आठवें दिन मनाया जाता है, जो आमतौर पर अंग्रेजी कैलेंडर में मई के महीने में आता है।
क्या इस अवकाश के दौरान पर्यटक आकर्षण खुले रहते हैं?
अधिकांश संग्रहालय, महल और पार्क खुले रहते हैं, जबकि सरकारी कार्यालय और बैंक बंद रहते हैं। बौद्ध मंदिर शाम को लालटेन प्रदर्शन के लिए खुले रहते हैं।